पटना में प्रशांत किशोर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर किया बड़ा खुलासा।

प्रशांत किशोर का बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय पर बड़ा खुलासा, बोले – दिलीप जायसवाल से पैसे लेकर दिल्ली में खरीदा फ्लैट, बैंक से लेनदेन के पुख्ता सबूत मौजूद, इसके बदले दिलीप जायसवाल के मेडिकल कॉलेज को ‘मानित विश्वविद्यालय’ का दर्जा दिया गया

प्रशांत किशोर का मंगल पांडेय पर एंबुलेंस खरीदने में भी भ्रष्टाचार का आरोप, बोले – गलत तरीके से टाटा मोटर्स का टेंडर खारिज कर फोर्स मोटर्स को मार्केट रेट से अधिक पैसा देकर एंबुलेंस क्यों खरीदा गया, प्रत्यय अमृत को भी इस मामले में जवाब देना चाहिए

प्रशांत किशोर ने भाजपा के आरोपों का दिया करारा जवाब, बोले – सरकार आपकी है अगर हमने कोई गलती की है तो पकड़ लीजिए, “बात बिहार की” का फेसबुक पेज हमलोग 2018 से चला रहे हैं

पटना। जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने आज पटना में एक बार फिर प्रेस कांफ्रेंस कर भाजपा के नेताओं के खिलाफ आरोपों की तीसरी किश्त जारी की। उन्होंने इस बार बिहार सरकार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय पर कई बड़े खुलासे किए। उन्होंने बड़ा आरोप लगाते हुए बताया कि स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल से किशनगंज के एमजीएम मेडिकल कॉलेज को डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा दिलाने के नाम पर 25 लाख रुपये की रिश्वत लेकर दिल्ली में अपनी पत्नी के नाम पर फ्लैट खरीदा।

प्रशांत किशोर ने बताया कि मंगल पांडे और दिलीप जायसवाल मित्र हैं। साल 2020 में कोविड के वक्त जब बिहार के लोग दवा-एम्बुलेंस के लिए मारे फिर रहे थे। तब स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने अपनी पत्नी के नाम पर दिल्ली के द्वारका इलाके में 86 लाख रुपये की कीमत का फ्लैट लिया। इसके लिए मंगल पांडेय की पत्नी उर्मिला पांडेय को उनके ससुर (मंगल पांडेय के पिता) अवधेश पांडेय के अकाउंट से 25 लाख रुपये दिए गए। बड़ी बात यह है कि अवधेश पांडेय के पास यह रुपये दिलीप जायसवाल के अकाउंट से ट्रांसफर किए गए। साथ ही मंगल पांडेय ने 2020 में दिए गए एफिडेविट में भी इस लोन का जिक्र नहीं किया है।

उन्होंने बताया कि 6 अगस्त 2019 को दिलीप जायसवाल के अकाउंट से यह रुपये आरटीजीएस के माध्यम से ट्रांसफर किए गए। फ्लैट की खरीदारी में दिलीप जायसवाल विटनेस भी बने। यह सब डॉक्यूमेंट हमारे पास है। छह अलग-अलग ट्रांजैक्शन से 86 लाख रुपये देकर फ्लैट लिया गया। इसके बाद किशनगंज के एमजीएम कॉलेज को डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा दिया गया। इसके पहले 20 साल तक एमजीएम कॉलेज बीएन मंडल यूनिवर्सिटी से डिग्री देता था।

प्रशांत किशोर का मंगल पांडेय पर एंबुलेंस खरीदने में भी भ्रष्टाचार का आरोप, बोले – गलत तरीके से टाटा मोटर्स का टेंडर खारिज कर फोर्स मोटर्स को मार्केट रेट से अधिक पैसा देकर एंबुलेंस क्यों खरीदा गया, प्रत्यय अमृत को भी इस मामले में जवाब देना चाहिए

प्रशांत किशोर ने मंगल पांडेय पर दूसरा गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि उनके स्वास्थ्य मंत्री रहते हुए बिहार में एम्बुलेंस की खरीदारी सामान्य से बढ़ी हुई कीमत पर की गई। साल 2022 में 1000 एम्बुलेंस खरीदने के लिए निविदा जारी की गई। इसमें 466 टाइप सी एम्बुलेंस 19.58 लाख रुपये की दर से फोर्स मोटर्स से खरीदे गए। अब 2025 में 250 एम्बुलेंस करीब 27 लाख रुपये में खरीदे गए, वो भी फोर्स मोटर्स से। इससे पहले टाटा मोटर्स का बिड यह कहकर हटा दिया गया कि एम्बुलेंस के ड्राइवर वाले हिस्से में एसी नहीं चाहिए। फिर फोर्स मोटर्स को 19 लाख की कीमत वाले एम्बुलेंस का 27 लाख प्रति एम्बुलेंस कीमत भुगतान कर 250 यूनिट के ऑर्डर दिए गए। जबकि इन्हीं एम्बुलेंस को ओड़िसा और यूपी सरकार ने कम कीमत पर खरीदा है। अगर बल्क परचेज हो तो कीमत कम होनी चाहिए, लेकिन बिहार सरकार ने कीमत बढ़ा कर एम्बुलेंस की खरीदारी क्यों की?

उन्होंने कहा कि एम्बुलेंस की खरीदारी के वक्त प्रत्यय अमृत स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव थे। इसलिए उनकी भी जिम्मेदारी बनती है कि जवाब दें। क्योंकि अब वो बिहार सरकार के मुख्य सचिव बनने वाले हैं। उनको क्लियर करना चाहिए कि क्यों 12-13 लाख का एम्बुलेंस पहले 19 लाख में खरीदा गया। फिर कुछ समय बाद उसी एम्बुलेंस को 27 लाख में खरीदा गया। अधिकारियों को ध्यान रखना चाहिए कि फाइल पर आपको ही साइन करना है। चारा घोटाले में लालूजी को तो सजा हुई ही, अधिकारी भी पकड़े गए थे।

प्रशांत किशोर ने यह भी बताया कि किशनगंज के एमजीएम कॉलेज में आयुष्मान कार्ड बनाने के नाम पर भी बड़ा फर्जीवाड़ा हुआ है। बड़ी अचरज की बात यह है कि बिहार में आयुष्मान कार्ड योजना के हेड वह शख्स हैं जो पहले स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय के पीएस हुआ करते थे।

प्रशांत किशोर ने भाजपा के आरोपों का दिया करारा जवाब, बोले – सरकार आपकी है अगर हमने कोई गलती की है तो पकड़ लीजिए, “बात बिहार की” का फेसबुक पेज हमलोग 2018 से चला रहे हैं

प्रशांत किशोर ने भाजपा के आरोपों पर कहा कि साल 2018 में जब मैंने जदयू छोड़ा तब मुझपर दबाव बनाने के लिए एक डमी आदमी को खड़ा करके कहा गया कि ‘बात बिहार की’ फेसबुक पेज मेरा नहीं किसी और का आईडिया है। मेरा काम ही नारा लिखना था। देश भर के नेताओं के लिए हम नारा लिखे और अपना ही लिखा नारा हम चोरी करके लायेंगे? यह मामला कोर्ट में गया, जहां खारिज हो गया। अब हाई कोर्ट में है। जजमेंट रिजर्व है। अब तो डीडी न्यूज भी बात बिहार की चला रहा है, उनपर भी केस कर दो। यह पेज हमलोग 2018 से चला रहे हैं। इसपर 25 लाख से ज्यादा लोग जुड़े हुए हैं। 5 करोड़ लोग उसपर फोटो-वीडियो देखते हैं। अगर हम कुछ गलत किए हैं तो सरकार तुम्हारी है, केस करके पकड़ लो।

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